कोरोना ने
पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। ये ऐसी महामारी साबित हो चुकी है, जिसने दुनिया
में लाशों के ढेर लगा दिए। इस बीमारी से जहां चंद लोग ठीक हो पाते हैं तो वहीं
मरीजों की संख्या लगातार आसमान छू रही है।
इसी के चलते
कोरोना के खिलाफ एक आशा की किरण थोड़ी सी खुशियां लेकर आई है। सूत्रों की माने तो कोरोना
से संक्रमित कई पुराने ठीक हुए मरीजों के खून से नए मरीजों का इलाज किया गया,
जिसके बाद नए मरीज ठीक हो गए। इस इलाज को चीन के हॉस्पिटल में सबसे पहले अपनाया
गया था। जहां इलाज के बाद तीन मरीजों को
अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, लेकिन दो लोग अब भी अस्पताल में भर्ती है जिनका स्वास्थ्य
पहले से बेहतर है।
सूत्रों के
मुताबिक इस तरह से मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के पुराने
मरीजों के खून से उपचार करने से बाकी के मरीजों को ठीक किया जा सकता है। आपको बता
दें कि चीन के एक हॉस्पिटल ने 27 मार्च को इस बात की जानकारी दी थी। वहीं अस्पताल
प्रशासन का कहना है कि जिन पुराने मरीजों के खून से नए मरीजों का इलाज किया गया
है, उनकी उम्र 36 से 79 साल है।
इस इलाज के
तरीके को वैज्ञानिक “कोवैलेसेंट प्लाज्मा” कहते हैं। जिसके अनुसार पुराने मरीजों के खून को नए मरीजों में डालकर उनकी
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है। हालांकि इससे कई बीमारियों को ठीक किया जा चुका
है।

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